अच्छा हो गया

 

अच्छा हो गया लक्ष्मी माते

तू मूर्त रूप नही धरतीपर

वरना तुझे चाहनेवाले तेरे भक्त्त

तुझ पर किये होमहवन, जयकारे,

यात्रा और लगाये नारे का देकर हिसाब

अगर हम पर नही कर सकती कृपा

तो कर ये सारा वापस सूतसमित कहकर

तेरे बाल खींचकर, हातपाव नोचकर

कर तेरा विनयभंग, निर्भया बना देते

 

हात जोडता हू लक्ष्मी माँ तुझे

तु ऐसे ही मूर्ती बने रह

भक्तो को लालच दिखाकर

उल्लू पे सैर करती रह

भूल के भी इनके सामने मत आना

ना इनके पूजापाठ से वशीभूत होना

अब आँख खोलने की तेरी बारी है

आगे तेरी जिम्मेदारी है

क्योंकि तू भी तो एक नारी है