आज के साधु

 

क्या जमाना आया है साहब

अब तो साधुसंत भक्तो को अपने पास बुलाते है,

प्रलोभन दिखाते है,

स्फटिक शिवलिंग या रुद्राक्ष मे हवा फूंककर

लोगो की जेबे खाली करते है

 

प्राचीन काल में साधु, समाधी लगाये युगो युगो बैठता था

शरीर अस्थिपंजर बन उसमे साप अपना बसेरा बनाता था

आज के साधु तो मानो कोई ब्यूटी पार्लर से आये मॉडल हो

किसी की हेयर स्टाईल अलग तो किसी की भुवये रंगी पलक

तंदुलतनु, उस पर डिजायनर कपडो की अलग ही झलक

 

आज के साधुओं की तपस्या ही बदल गयी है

बडे बडे होर्डिंग्सपर ध्यान लगाए पोज मे सज गयी है

जब भी आये किसी बडे भगवान का बर्थडे

बाटने अपने तपोबल से प्राप्त की दिव्यशक्ती

दिखाने चमत्कार इनकी समाधी भंग होने लगी है

 

पहले साधु घने जंगलो मे साप, बिच्छू के सिराहने रहता था

बिना किसी मतलब के मुफ्त मे अपना आशीर्वाद देता था

जो दे उसका भला, ना दे उसका भी भलाकहकर चला जाता था

बडी बरकत थी उसकी दुवाओ मे

इंसान जो भी चाहता था वो पाता था

 

आज के साधुओं के तो तेवर ही बडे अलग है

आश्रमो मे एयर कंडीशनर लगे है,

महंगे गाडियों के काफिले सजे है

दान मे मिले फुकट की जमिनोपर कब्जा कर पीठाधीश बन,

विभिन्न वस्तुओं पर अपनी मुहर लगाये

करोडो, अरबो कमाकर सत्ता सुंदरी का मजा लेने लगे है

 

गलती उनकी नही है, हमने ही अपनी समस्याए बढा ली है

बुजुर्गो की सलाह कान दुखाती है, और इनकी वाणी दिल बहलाती है

अच्छे कर्मोपर विश्वास नही, काला जादू, वशीकरण मन को छूती है

एक दुसरो की निंदा कर अपना महत्व बढाने की मंशा जगी है

पल मे सब पाने को ऐसे पाखंडी बाबाओ की सीढिया चढने लगी है