कोशिश नसीब खरीदने की

 

इंसान कितनी कोशिश करता है

नसीब खरीदने की

पहनता है गले मे माला

और उंगलियों मे अँगूठिया नवग्रहों की

बदनपर कोरता है तसवीरे भगवान की

कानो और हातो पे लिखता है

आयते रामायण और कुरान की

घर के हर एक कोने मे रखता है छबी भगवान की

जुबापर भी रामनाम

और झुककर सलाम भी

कर याद उस परवरदिगार की

घर की नीव भी रखता है होमहवन कर

अनदेखी न कर वास्तुपुरुषो के नियम की

पर भी प्यारे इंसान भटकता है

पाने शांति दो पल की

 

अरे क्या बेवजह राम, रहीम का नाम जपना

करो भलाई जगत की

बदलेगी किस्मत

जब थामोगे उंगली नेकी के राह की