टूटे हुए मस्जिद का मलबा

 

रास्ते पे एक जगह

दिखा टूटे हुए मस्जिद का मलबा

बचे हुए दीवारो पे

गोलियों के निशान थे

ईट और पत्थर बिखरे पडे थे

 

मानो ऐसा लग रहा था

हम मे से किसी इबादत करनेवाले ने

खुदा को गोलियों से छलनी कर

उसके आशियाने को तहसनहस कर दिया हो

 

देखा उस मंझर को तो

आंख भर आयी और चक्कर आकर गिर पडा जमीन पर

वो रौशनी दिखानेवाला चाँद लहूलुहान होकर भी

दुवाए दे कर हँस रहा था हमारे इंसानियत पर

 

हजारो की भीड गुजर रही थी उस रास्ते से

किसी ने न वास्ता रखा उस हादसे से

दूर किसी वीराने से आवाजे गूंज रही थी अजानो की

आँखे बंद कर, मुंडिया घुमाकर गर्दने झुक रही थी नमाजियों की

 

आशियाना उजड चूका था अब खुदा वहा बचा ही कहा था

एकदिन अखबार में पढा कोई हमलावर किसी ईदगाह मे

छिपकर दीवारो के पीछे ताने रसूल के सिने पर बंदूक

न जाने किस की जान लेने के लिए ताक रहा था