धर्मग्रंथ

 

किसी भी भाषा का धर्मग्रंथ

हिंदी, उर्दू या अंग्रेजी

भले ही उसकी भाषा हो भिन्न

परंतु मतलब तो सबका एक ही है

है सब ईश्वर के बंदे

नेकी के राह चले सारे धरतीवासी

चाहे वो मानव, जानवर या हो पशुपक्षी

सब रहे मिलजुलकर,

सबका जीवन हो सुखी संपन्न

 

ये केवल धर्मग्रंथ ही नही

वो तो है अमन का रास्ता दिखनेवाला चिराग

उसमे छुपा है ऐसा जिन्न

जब समझोगे सही मतलब उसमे लिखी लिखावट का

तो सफल होगी सारी उम्र

अगर आवोगे किसी के बहकावे मे

तो बन जाएगी कब्र

 

द्वेष, इर्षा, मत्सर करना नही सिखाता कोई भी धर्मग्रंथ

उसमे लिखी लिखावट यही बताती है

सब मे बडी है बंदगी

रहो मिलजुलकर

भूलकर जात, पात, धर्म और पंथ