मजहब

 

अरे मजहब, मजहब क्या करता है

सबका धरम एक है

तेरा खुदा मेरा, मेरा भगवान तेरा

तेरी ईद मेरी, मेरा रौशनीसा जगमगाता

दिवाली का त्यौहार तेरा

अजान तेरी, उसमे से निकलती दुवाये मेरी

घंटियो की आवाज मेरी,

उसमे से निकलती मंगल ध्वनि तेरी

मस्जिद के लिए बडी इज्जत दिल मे मेरे

मंदिर के सामने झुके निगाहे तेरी

उसमे होती इबादत मेरी

मंदिरो से निकलती सदाकत तेरी

अगर मै गिर जाऊ जमीन पर

जाग उठे जमीर तेरा

भूलकर जातिधरम की बंदिशे

उठाकर अपनी बाहो मे, तू बने मेरा सहारा

खुदा का रंग एक है, आकाश का रंग एक है

उसमे बसा इंद्रधनु भगवान का रूप है

बारिश मे तू भी भीग जाये, मै भी भीग जाऊ

दोनो के भी सुखदुःख एक जैसे

तो फिर ये तू, तू, मै, मै क्यू ?

मेरे भगवान को तेरा नमस्कार

तेरे खुदा को मेरा आदाब

सलामदुवा करके निकलेंगे

नेकी के राहपर जनाब