माँ-बाप की दुवाये

 

क्या पीर, फकीर, साधु से दुवाये लेते हो,

पक्षियो और चिटियो को दाना देते हो,

ढोलताशे बजाकर भगवान का बडप्पन गाते हो

अरे जिस माँबाप ने दुनिया दिखाई, चलना सिखाया,

खुद भूके रहकर, तकलीफे सहकर

रंजो गमो को तुमसे कोसो दूर रखा

अपने आँचल मे छिपाया, सिनेसे लगाया

उनको मनमंदिर में बिठाना छोडकर

जिस वक्त उन्हे सहारा चाहिए

उस वक्त उन्हे अकेला छोडकर

क्यों बुजुर्गो की बददुवा लेते हो

 

हाडमांस के मातापिता को छोड

लाख तू चुमले सारी दुनिया के भगवानो की चौराहे

वहा से खाली ही आयेंगा तू

बिना कुछ पाये, मुँह लटकाये

अरे असली मसीहा तो तेरे जनमदाता मातापिता है

असली बरकत तो उनकी ही दुवा मे है