मै हिंदू हूँ, मुस्लिम हूँ, ईसाई हूँ

 

मै हिंदू हूँ, मुस्लिम हूँ, ईसाई हूँ

जितने भी धरम जगत मे है

उस धरम का मै इंसान हूँ

मेरा हात, पाव, मस्तिष्क

मेरा सर्वोच्च करमग्रंथ है

सब इंसान एक है, यह सोच के

इंसानियत के काम आनेवाला हूँ

 

मेरा ना कोई धरम

ना किसी बूत, दिवार के आगे

झूक के करता हूँ सुमीरन

लिये कफनी हातो मे

मिली हिंदू, ख्रिश्चन की भीक से

भूके को रोटी खिलानेवाला हूँ

 

मै हिंदू हूँ, मुस्लिम हूँ, ईसाई हूँ …..